रंगमंच तथा विभिन्न कला माध्यमों पर केंद्रित सांस्कृतिक दल "दस्तक" की ब्लॉग पत्रिका.

बुधवार, 23 नवंबर 2011

हबीब के गीत रहमान की चोरी


2 टिप्‍पणियां:

  1. kala ke kshetra mein chori shabd ka prayog mujhe uchit nahin pratit hota.koi kalakar yadi doosre ki rachnaa ka prayog yadi apni shaili mein kare to use 'inspiration' kaha jaaye.rahmaan ne kai lokdhunon ka prayog apni shaili mein kar shrotaon ko romanchit kiya hai, ise hum nakaar nahin sakte.-_vivek/PRANGAN/PATNA.

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  2. यह छत्तीसगढ़ का बहुत पुराना लोकगीत है. भूलवाराम यादव ने इस गीत को अपनी आवाज से अमर कर दिया. हबीब तनवीर ने इस गीत का प्रयोग 'गांव का नांव ससुरार मोर नांव दामाद' में किया था.

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