रंगमंच तथा विभिन्न कला माध्यमों पर केंद्रित सांस्कृतिक दल "दस्तक" की ब्लॉग पत्रिका.

सोमवार, 19 मार्च 2018

अभिनेता की डायरी : भाग नौ

व्यस्ता ज़्यादा होने की वजह से डायरी का चाहकर भी स्थगित होता रहा। आज से कोशिश रहेगी रोज़ आपके समक्ष हो। यह आलेख कुछ दिन पहले का है।
#चंदन - आज हमलोगों ने एक खेल खेलने की कोशिश की जिसे कभी हमलोग बचपन मे खलते थें। क्या मज़ा आता था। लेकिन आज फिर से वही खेल को खेल के वो वाला मज़ा नही आया। जो बचपन मे खलने पर आता था।वो मासुमियत नही थी, वो एनर्जी नही थी, वो ख़ुद का समर्पण नही था.....। हमलोगों ने इस खेल को नाटक के तरह खेलने की कोशिश की हैं।
आज हमें विनीत भईया(एक्टर) से मिलने का मौका मिला। जो 8 वें थिएटर ओलंपिक्स की तरफ़ से मुख्य अतिथि के तौर पर पटना में आमंत्रित थे। उनसे बहुत सारी बाते जानने को मिली जो  एक अभिनेता के लिए वरदान की तरह हैं। जैसे - आप पढ़ते है उसे समझने की कोशिश कीजिये, जो आप करते है उसे देखने की कोशिश कीजिये। तारीफ़ करवाने से दूर रहिये। किसी अभिनेता से प्रभावित नही हो,अगर आप प्रभावित होते है तो आप कॉपी करते हैं........
#संतरंजन - भूले -बिसरे खेल
जब कोई कलाकार अपनी कला की रचना करता है तो उसकी कला में उसकी ही संस्कृति झलकती है । अब ये दीगर बात है कि हम अपनी संस्कृति को भूले जा रहे हैं , और शायद यही कारण है कि हम अपनी ही कला में उतना महारथ हासिल नहीं कर पा रहे हैं जितना कि हम कर सकते हैं ।
             पिछले तीन दिनों से हमलोग हर रोज़ हमारी संस्कृति से जुड़ी और हमारे बचपन के वो सारे खेल पुनः खेलने और उसे समझने की लगातार कोशिश कर रहे हैं जिन्हें हम अब तक भूल चुके थे ।
#आकाश_कुमार : लॉस्ट पैराडाइज़ : भूले बिसरे खेल : गाना_गोटी
गाना गोटी खेलने का खेल हैं नाकि देखने का जनाब क्योंकि खेल का अर्थ ही होता है उतसाह के साथ से  खेलना। गाना गोटी देखने में सरल प्रतीत होता है परन्तु खेलने में उतना ही कठिन होता हैं। यह खेल शरीर के तीन हिस्सों (दिमाग, आँख और हाँथ) को एक्करकित करते हुए एकाग्रता के साथ खेलना होता है।पिछले कुछ दिनों से हमलोग शारीरिक अभ्यास के पश्चात "लॉस्ट पैराडाइज़ : भूले बिसरे खेल" नामक श्रृंखला के तहत अपनी संस्कृति में खेले जानेवाले वैसे खेलों को याद करने की कोशिश कर रहे हैं जो विलुप्त होने के कगार पर है। हमें फर्ज़ बनता है अपने दोस्तों , आस पास के लोगों को और आने वाले पिरि को खेलते खेलते इस खेल से रूबरू कराये।
आपके मन में यह सवाल जरूर उत्पन हो रहा होगा कि एक अभिनेता को ऐसे खेल से क्या मिलेगा अभिनय के दुनिया में?
इसका सरल जवाब है अभिनेता को रचनात्मक बनाता हैं, खेलेंगे तो सोचेंगे, समझेंगे और अमल करते हुए एक बेहतरीन खेल खेलेंगे।अभिनेता को खेल से स्वास्थ्य और तंदरुस्ती को सुधारने और बनाए रखने, मानसिक कौशल और एकाग्रता स्तर के साथ ही सामाजिक और वार्तालाप या संवाद कौशल को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
#विनीत_कुमार ने जो मूल बातें कहीं वो निम्न हैं -

अभिनेता को अपना अच्छा अभिनय करने के बाद उसे कूड़ेदान में डाल देना चाहिए और पुनः नए सिरे से शुरुआत करने चाहिए।


किसी से प्रभावित होने की ज़रूरत नहीं बल्कि यह समझने की कोशिश करें कि वो प्रभाव क्यों छोड़ रहा है।

किसी की नकल करने की ज़रूरत नहीं है। आपको अपनी एक अलग पहचान बनानी चाहिए।

अभिनय आज भी आसान नहीं है मेरे लिए।

समस्या को समस्या की तरह नहीं बल्कि समाधान की तरह देखो।

सारे सवाल ख़त्म हो गए? अभी तो आप कह रहे थे कि बहुत समस्या है।

सफलता क्या है ? मैं दूसरे दिन सुबह उठता हूँ और देखता हूँ कि मेरी सांस चल रही है, मैं सफल हूँ।

आध्यात्मिक होना और धार्मिक होना अलग अलग अवस्था है।

विरोध से पूर्व अपनी शक्ति जांच लेनी चाहिए।

जिसे समय और स्थान की समझ नहीं वो अभिनेता नहीं हो सकता।

सवाल करना सिखो।

खुद अपने आप को बतौर अभिनेता समृद्ध करें ।

कराईसिस अभिनय को जन्म देता है।

ऑप्शन और सुविधा में अच्छी कला का जन्म नहीं होता।

एक अभिनेता को 24 घण्टे तैयार रहना चाहिए।

आम आदमी देखता ज़्यादा है बोलता काम है और जब वो बोलता है तब बहुत प्रभावशाली होता है। अब आम आदमी बहुत कम हो गए हैं।

मुझे अभी भी अभिनय समझ नहीं आया है, प्रयासरत हूँ।  लोग मुझे बहुत स्नेह करते हैं, यही मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है। मेरा सफ़र बहुत अद्भुत रहा है। समस्या का कारण मैं रहता है, कुछ और नहीं। मैं कला संगम, पटना का हनुमान रहा हूँ। पिछले 27 सालों से मैंने कुछ किया नहीं है। मैं अपने को आज भी थियेटर का मानता हूं और पिछले 27 साल से थियेटर समझ रहा हूँ।

मेरा सफ़र बहुत अद्भुत रहा है। समस्या का कारण मैं रहता है, कुछ और नहीं। मैं कला संगम, पटना का हनुमान रहा हूँ। पिछले 27 सालों से मैंने कुछ किया नहीं है। मैं अपने को आज भी थियेटर का मानता हूं और पिछले 27 साल से थियेटर समझ रहा हूँ।

सफलता क्या है ? मैं दूसरे दिन सुबह उठता हूँ और देखता हूँ कि मेरी सांस चल रही है, मैं सफल हूँ।

#विनीत_कुमार
 #थियेटर_ओलंपिक_पटना
#एलाइड_एक्टिविटी
#मास्टर_क्लास

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