रंगमंच तथा विभिन्न कला माध्यमों पर केंद्रित सांस्कृतिक दल "दस्तक" की ब्लॉग पत्रिका.

मंगलवार, 20 मार्च 2018

अभिनेता की डायरी : भाग दस

बचपन में खेले गए किसी खेल को पूरी तमयता के साथ खेलिए फिर देखिए कि क्या जादू घटित होता है। लेकिन इस जादू को समझने के लिए जागरूक दिमाग की आवश्यकता पड़ेगी, साधारण दिमाग से यह शायद ही समझ में आए। कोई भी खेल केवल खेल नहीं होता बल्कि वो अपने आपमें ऐतिहासिक, भौगोलिक, सांस्कृतिक आदि का एक अद्भुत नमूना होता है। ऐसे ही कुछ खेलों को खेलकर प्राप्त हुआ यह अनुभव -
#चंदन आज फिर से हमलोगों ने बचपन की यादें ताजा की, बचपन का एक खेल'गाना गोटी' खेलके। फिर से बहुत सालों बाद ये खेल खेलके मज़ा आ गया। बचपन में क्यों खेलते थे याद नहीं।लेकिन ये सब खेल अब लुप्त हो रहा हैं। आज के बच्चे को मोबाइल गेम में ही मज़ा आता हैं।जिसके बहुत सारे ख़राब प्रभाव होते हैं। लेकिन वो सब  गेम का बहुत सारा फायदा हैं। जैसे-जागरूकता,प्रजेंस ऑफ माइंड,सावधानी,ईमानदारी अपने पार्टनर के प्रति।सबसे बड़ी बात यह कि आप आउट डोर खेल के बहाने अपने पड़ोस के बच्चों से परिचित होते हो।उसके माता-पिता को जानते हो। उसके घर मे क्या चल रहा है वो जानते हो। क्योंकि आप उसके साथ रहते हो,उससे बात करते हो। एक और ख़ास बात यह कि इसमें सभी वर्ग के बच्चे साथ खेलते हैं,साथ में रहते हैं। अपनी बात एक-दूसरे से कहते हैं। जिससे उनमे भेद-भाव का स्वभाव विलुप्त हो जाता हैं।......
#सुशांत मंजिल को हासिल करने के लिए जैसे रोज रास्ते पर चलना जरूरी है ठीक उसी प्रकार पूरे जिंदगी स्वस्थ रहने के लिए प्रतिदिन व्ययाम करना जरूरी है। बॉलीवुड स्टार अक्षय कुमार कहते है कि अगर आप प्रतिदिन 1 घंटा व्ययाम नही कर सकते है तो आपका मनुष्य में जन्म लेना बेकार है।
अपने थिएटर एक्टिविटी में हम लोगो ने एक नया क्रिया कलाप को शामिल किया है जिसका नाम है लॉस्ट पैराडाइस यानी भूले  बिसरे खेल। इस एक्टिविटी में हमने उन खेलो को शामिल किया है जिसे हम बचपन से खेल खेल के बड़े हुए है और आज वो खेल बिलुप्त होने के कगार पे  है। इस एक्टिविटी के तहद हम यह जानने की कोशिश करेंगे कि आखिर उस खेल का मूल मकसद क्या था और वो हमें किस तरह प्रभावित करता था।
आज हमलोगों ने गाना गोटी नामक खेल को खेला। इस खेल में दो खीलाड़ी होते है और पांच पत्थर की गोटी होती  है। इस खेल को खेलते समय हमारा दिमाग, आंख और हाथ एकत्रित रहता है। इसके साथ साथ इस खेल में एक प्रकार के विपरीत बल भी उत्पन होती है। इस प्रकार हम कह सकते है कि यह खेल के साथ साथ दिमागी एकाग्रता छमता को बढ़ाने वाला एक व्ययाम भी है।
सुशांत कुमार
#संदेश आज हमलोग अपने बचपन में चले गए थे। बात यह थी कि आज हमलोग गाना गोटी खेल रहे थे बड़ी मज़ा आया एक दम मासूमियत से सारे दोस्त खेल रहे थे।वैसे भी एक कलाकार के अंदर हमेशा मासूमियत होनी चाहिए।आज के समय में ये खेल लगभग समाप्त होने वाला है या हो गया है । खेल कोई भी हो उसे खेलने में ही आनंद आता है न कि देखने मे।हमलोग तो बस ऐसे ही खेले जा रहे थे लेकिन गुरु जी बताय की खेल को पहले समझो उसके बारे में सोचो कि उससे क्या-क्या होता हैं अभी तक उसी में लगे है
संदेश कुमार
#प्रशांत : आज हमलोगों ने अपने बचपन वाले दिन को याद किया। आज हमलोगों ने गाना गोटी खेला। बैठ के खेल जाने वाले इस खेल जितना आसान देखता है उतना है नही। इस खेल को खेलते समय अपने दिमाग को एकाग्रता रखना पड़ता है। इस खेल में दिमाग के साथ साथ हाथ और आंख को भी एकगरित करना पड़ता है। इस खेल को खेलते समय हम एकदम बच्चे बन गए थे।

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